3 बड़े कारणों से टीम इंडिया के टी20I स्क्वाड में भुवनेश्वर कुमार की वापसी है गलत फैसला
भारतीय क्रिकेट टीम के न्यूजीलैंड दौरे पर होने वाली टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को लंबे समय बाद वापसी का मौका मिला है।

Bhuvneshwar Kumar Comeback in T20I: भारतीय क्रिकेट टीम कुछ ही दिनों के बाद न्यूजीलैंड के दौरे पर जा रही है। जहां होने वाली टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो चुका है। मंगलवार को बीसीसीआई की सेलेक्शन कमेटी ने श्रेयस अय्यर की कप्तानी में 16 सदस्यीय टीम का ऐलान किया, जिसकी सबसे बड़ी सुर्खियां भुवनेश्वर कुमार की वापसी रही। भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाजों में से एक भुवनेश्वर कुमार को इस सीरीज के लिए चयन किया गया है।
आईपीएल के पिछले लगातार 2 सीजन से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे भुवनेश्वर कुमार की इंटरनेशनल क्रिकेट में 4 साल बाद वापसी हो रही है। भुवी के फैंस इसे लेकर काफी उत्साहित हैं, लेकिन वहीं इसे लेकर कुछ सवाल भी उठना लाजिमी है। तो चलिए आपको इस आर्टिकल में बताते हैं 3 बड़े कारण, क्यों भुवनेश्वर कुमार की टी20 इंटरनेशनल वापसी का फैसला गलत है।
#1. लंबे समय से इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी
दिग्गज तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी पर सबसे बड़ा सवाल उनके लंबे इंटरनेशनल ब्रेक को लेकर है। अनुभवी तेज गेंदबाज ने 4 साल से भारत के लिए कोई इंटरनेशनल मुकाबला नहीं खेला है और ऐसे में लंबे ब्रेक के बाद इंटरनेशनल स्तर पर वापसी करना आसान नहीं होगा। T20 क्रिकेट में खासतौर पर गेंदबाजों को लगातार मैच प्रैक्टिस, रफ्तार और लय की जरूरत होती है। भुवनेश्वर का अनुभव जरूर उनके पक्ष में है, लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद उन्हें टीम में शामिल करना कितना प्रभावी साबित होगा, यह बड़ा सवाल है। टीम इंडिया जिस दौर में युवा और लगातार इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे तेज गेंदबाजों को तैयार कर रही है, वहां लंबे समय से बाहर चल रहे खिलाड़ी को मौका देना चयन के फैसले पर सवाल खड़े करता है।
#2. बढ़ती उम्र से फिटनेस पर सवाल
दूसरा कारण भुवनेश्वर कुमार उम्र और उससे जुड़ी फिटनेस है। उम्र बढ़ने के साथ तेज गेंदबाज के लिए लगातार हाई-इंटेंसिटी क्रिकेट खेलना और लंबे समय तक अपनी गति व फिटनेस बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।36 साल के हो चुके भुवनेश्वर की सबसे बड़ी ताकत हमेशा उनकी स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ रही है, लेकिन आधुनिक T20 क्रिकेट में सिर्फ अनुभव काफी नहीं है। तेज गेंदबाज से पावरप्ले के साथ-साथ डेथ ओवर्स में भी प्रभावी गेंदबाजी की उम्मीद रहती है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट को यह देखना होगा कि क्या भुवी मौजूदा T20I क्रिकेट की तेज रफ्तार और लगातार बढ़ती फिटनेस डिमांड के साथ पूरी तरह तालमेल बैठा पाएंगे।
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#3. युवा तेज गेंदबाजों के साथ अन्याय
भुवनेश्वर कुमार की वापसी का सबसे बड़ा असर उन युवा तेज गेंदबाजों पर पड़ सकता है, जो पिछले कुछ समय से घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके टीम इंडिया में दस्तक दे चुके हैं। भारतीय क्रिकेट के पास इस समय तेज गेंदबाजी में कई युवा विकल्प मौजूद हैं, जिन्हें इंटरनेशनल स्तर पर ज्यादा मौके देकर भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है। इन गेंदबाजों की बात करें तो पिछले कुछ समय से प्रिंस यादव से लेकर मयंक यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, यश ठाकुर, गुरनुर बराड, अंशुल कंबोज जैसे गेंदबाजों को मौका दिया जा रहा है। ऐसे में अगर अनुभव के नाम पर भुवनेश्वर को प्राथमिकता मिलती है, तो युवा गेंदबाजों के लिए मौके कम हो सकते हैं। खासकर T20 क्रिकेट में जहां टीमों को भविष्य की योजनाओं पर तेजी से काम करना होता है, वहां किसी अनुभवी खिलाड़ी की वापसी और किसी युवा प्रतिभा के मौके के बीच संतुलन बनाना चयनकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती होगी।




