भारत में नहीं खुली किस्मत, विदेश में चमका सितारा... हरप्रीत भाटिया का इंडिया से यूएई के कप्तान बनने की कहानी
भारतीय क्रिकेट में करीब डेढ़ दशक से ज्यादा वक्त से घरेलू क्रिकेट में छाप छोड़ने के बाद हरप्रीत सिंह भाटिया संयुक्त अरब अमीरात चले गए और वहां इंटरनेशनल डेब्यू के साथ ही अब कप्तान भी बन गए।

Harpreet Singh Bhatia Cricket Journey: भारतीय घरेलू क्रिकेट में करीब 18 साल तक लगातार संघर्ष करने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज हरप्रीत सिंह भाटिया की किस्मत आखिरकार 2026 में बदली। भारत के लिए खेलने का सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन अब उन्हें यूएई क्रिकेट टीम की कप्तानी मिल गई है। हाल ही में यूएई क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 ट्राई-सीरीज के लिए टीम का कप्तान नियुक्त किया।
हरप्रीत सिंह भाटिया यूएई के बने कप्तान
इस आर्टिकल में जानते हैं, कैसे हरप्रीत सिंह भाटिया भारत में डेढ़ दशक से भी ज्यादा खेले और टीम इंडिया में खेलने का सपना पूरा ना हो सका और फिर यूएई की उड़ान भरी और वहां 34 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू के कुछ ही दिन बाद कप्तान बन गए।
हरप्रीत सिंह भाटिया का क्रिकेट सफर
हरप्रीत सिंह भाटिया का जन्म 11 अगस्त 1991 को मध्य प्रदेश के दुर्ग में हुआ। उनके पिता और बड़े भाई दोनों क्रिकेट खेलते थे। घर की दीवार पर स्टंप बनाकर प्लास्टिक की गेंद से क्रिकेट खेलते हुए उनके क्रिकेट सफर की शुरुआत हुई। परिवार का सपना था कि हरप्रीत एक दिन भारत के लिए खेलें।
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प्रतिभा को देख आईपीएल में भी मिला मौका
हरप्रीत ने मध्य प्रदेश की जूनियर टीमों से खेलते हुए तेजी से पहचान बनाई। उनकी बल्लेबाजी से प्रभावित होकर उन्हें 2009-10 में सेंट्रल ज़ोन और बाद में आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने मौका दिया। जहां वो कोलकाता नाइट राइडर्स, पुणे वॉरियर्स इंडिया रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के साथ ही पंजाब किंग्स की जर्सी में उतरे।
घरेलू क्रिकेट में लगाया रनों का अंबार, नहीं मिला टीम इंडिया का टिकट
हरप्रीत ने पहले मध्य प्रदेश और बाद में छत्तीसगढ़ के लिए घरेलू क्रिकेट खेला। रणजी ट्रॉफी, विजय हज़ारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने लगातार रन बनाए।उनके प्रथम श्रेणी करियर में कमाल के आकड़े रहे, जहां उन्होंने 86 मैच खेले और 5 हजार से ज्यादा रन बनाए। वहीं 96 लिस्ट ए मैचों में 3 हजार से ऊपर रन व टी20 में 109 मैच में 3 हजार से ज्यादा रन बनाए।
घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन के बावजूद हरप्रीत को कभी भारतीय टीम में मौका नहीं मिला। कई बार इंडिया ए और विभिन्न जोनल टीमों तक पहुंचे, लेकिन सीनियर टीम का दरवाजा नहीं खुला। यही उनके करियर का सबसे बड़ा दर्द रहा।
एक फोन कॉल से बदली किस्मत, यूएई से मिला इंटरनेशनल डेब्यू
2026 में यूएई के मुख्य कोच लालचंद राजपूत ने हरप्रीत से संपर्क किया। उन्हें यूएई की नागरिकता मिलने के बाद राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का मौका मिला। अप्रैल 2026 में नेपाल दौरे पर उन्होंने यूएई के लिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया। 34 वर्ष की उम्र में पहली बार किसी नेशनल टीम की जर्सी पहनना उनके लिए बेहद भावुक पल था।
सिर्फ 6 इंटरनेशनल मैच के बाद मिली कप्तानी
डेब्यू के कुछ महीनों बाद ही यूएई क्रिकेट बोर्ड ने उन पर बड़ा भरोसा जताया और जुलाई 2026 में स्कॉटलैंड और कनाडा के खिलाफ होने वाली ICC क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 ट्राई-सीरीज के लिए उन्हें टीम का कप्तान बना दिया। नियमित कप्तान मोहम्मद वसीम की गैरमौजूदगी में हरप्रीत को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। केवल 4 वनडे और 2 टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने के बाद कप्तानी मिलना बड़ी बात है।




