वैभव को खिलाने के लिए संजू सैमसन के साथ ‘धोखेबाजी’, हमेशा संजू ही क्यों बने बलि का बकरा
भारतीय क्रिकेट टीम में एक बार फिर से प्लेइंग-11 कॉम्बिनेशन के नाम पर स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को बाहर किया।

Team India star Sanju Samson dropped from playing XI: 5 मैच, 321 रन और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट... इसके साथ ही देश के लिए वो ऐतिहासिक पल, जो हर कोई सीने से लगाना चाहता है... वर्ल्ड कप ट्रॉफी....टीम इंडिया को लगातार दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले नायक ने एक तरह से अपनी जगह टीम में लंबे समय तक फिक्स कर ली थी,
टीम कॉम्बिनेशन की आड़ में संजू से ही नाइंसाफी क्यों?
लेकिन वर्ल्ड कप के बाद 3 मैच खेले और टीम मैनेजमेंट ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि इन 3 मैच में बल्ले से सिर्फ 6 रन निकले थे, लेकिन हमेशा ही किसी खिलाड़ी की टीम में जगह बनाने के लिए बलि का बकरा बनने वाले संजू सैमसन के साथ ही ऐसा क्यों?
हमेशा संजू सैमसन ही क्यों दें बलिदान?
टीम इंडिया के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। इस खिलाड़ी ने भारतीय टीम के लिए वर्ल्ड कप में चमत्कार किया। और आखिरी 3 बड़े नॉक आउट मैचों में जो का किया, उसकी कीमत पूरा भारत ही नहीं पूरी दुनिया जानती है, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने एक झटके में इस खिलाड़ी को लात मार दी।
वैभव सूर्यवंशी को खिलाने के लिए संजू को बनाया बलि का बकरा!
भारतीय क्रिकेट में 15 साल के उभरते लड़के वैभव सूर्यवंशी का उदय हो रहा है। बिहार के इस लाल को टीम में लेने की मांग काफी तेज होने लगी थी और जैसे-जैसे यूके टूर पर संजू सैमसन का बल्ला नाकाम होने लगा, तो वैभव को खिलाने की राष्ट्रव्यापी मुहिम बन गई, लेकिन क्या वैभव को खिलाने के लिए संजू सैमसन को ही बाहर करना कहां का न्याय है।
संजू सैमसन रहे हैं वर्ल्ड कप 2026 के सबसे बड़े नायक
संजू सैमसन भारतीय टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे एक्साइटिंग बल्लेबाज रहे हैं। इस खिलाड़ी ने जब भी अपनी धार दिखायी है, तब वो टीम को मैच जीताकर आए हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण वर्ल्ड कप 2026रहा है। इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया को वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 में हर हाल में जीत जरूरी थी, अभिषेक, ईशान, सूर्या, तिलक जैसे सभी सितारें फ्लॉप रहे ते। तब उन्होंने मुश्किल परिस्थियों में 50 गेंद में 97* रन की पारी खेलकर भारतीय टीम को जीत दिलाकर दम लिया।
अब बारी थी वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल की, जहां इंग्लैंड के बॉलिंग अटैक को संजू ने तहस-नहस डारा और सिर्फ 42 बॉल में 89 रनों की तूफानी पारी खेलकर टीम इंडिया के स्कोर को 250 के पार पहुंचानें में अहम योगदान दिया। इसके बाद वर्ल्ड कप फाइनल, यहां भी इस स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपना जलवा दिखाया और न्यूजीलैंड के खिलाफ संजू खूंखार नजर आए। उन्होंने 46 गेंद में 89 रन की एक और मैच विनिंग पारी खेली।
नायक के साथ खलनायक जैसा व्यवहार क्यों?
टीम इंडिया ने इस वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों में संजू सैमसन को बाहर रखा था। संजू वर्ल्ड कप से करीब एक साल पहले से ही ओपनिंग प्लान का मजबूत विकल्प थे। लेकिन जब उनका बल्ला थोड़ा सा रूठा और ईशान किशन ने कुछ अच्छी पारियां खेली, तो टीम मैनेजमेंट ने संजू को प्लेइंग-11 से बाहर कर किशन को खिलाया। यहां ईशान को टीम कॉम्बिनेशन में फिट करने के लिए संजू को ही बलि का बकरा बनाया गया।
संजू को टीम में बनाए रखने का दिग्गजों ने भी किया खुलकर सपोर्ट
वैभव सूर्यवंशी को लेने की मांग तेज होने पर कुछ दिन पहले पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने संजू का खुलकर सपोर्ट किया था। कार्तिक का मानना था कि ,
"संजू सैमसन पिछले तीन मुकाबलों में अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलने में नाकाम रहें हैं। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को टीम में लाने की मांग और ज्यादा बढ़ गई है। फिर भी मैंनेजमेंट को कहूंगा कि संजू को ही भारतीय टीम में बनाए रखें. सैमसन टी20 वर्ल्ड कप 2026 में "प्लेयर ऑफ दी" मैच रहे हैं। वह इस समय प्रेशर महसूस कर रहे हैं. सारा जगत ये चाहता है कि वैभव को टीम में लाया जाए, लेकिन संजू सैमसन जैसे कमाल के खिलाड़ी को स्पोर्ट करना इस वक्त बेहतर रहेगा। उनकों स्पोर्ट करने के पीछे बड़ी वजह यह है कि 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भी उन्होंने प्रेशर में ही अपना सर्वक्षेष्ठ प्रदर्शन दिखाया था। इस प्रेशर वाले समय में उन्हीं का समर्थन करना बेहतर होगा।"
वहीं वैभव को इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में टीम में लाने के लिए संजू को बाहर करने पर दिग्गज कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने भी बड़ी बात कही है। मांजरेकर का कहना है कि,
"वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम में देखकर खुशी हुई, लेकिन संजू सैमसन का नाम अंतिम एकादश में नहीं देखकर वह हैरान हैं। शायद सैमसन किसी चोट के कारण बाहर हों। अगर ऐसा नहीं है तो चयन समिति और टीम प्रबंधन का यह फैसला काफी अजीब माना जाएगा। अगर वैभव को मौका देना ही था तो संजू को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कराई जा सकती थी।"
2015 में डेब्यू करने वाले संजू सैमसन को कईं बार किया गया बाहर
संजू सैमसन टीम इंडिया के एक बहुत बड़े प्रभावशाली और मैच विनर खिलाड़ी रहे हैं। उन्हें लेकर आज से नहीं बल्कि 2015 में उनके डेब्यू के बाद से ही टीम मैनेजमेंट द्वारा ‘धोखेबाजी’ की जा रही है। संजू ने 11 साल पहले इंटरनेशनल डेब्यू किया है फिर भी वो आज तक सिर्फ 65 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल सके हैं,, तो वहीं उनके बाद टीम में आने वाले कई खिलाड़ी 100 के करीब या 100 के पार मैच खेल चुके हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि टीम मैनेजमेंट कॉम्बिनेशन के नाम पर हमेशा संजू सैमसन को ही टारगेट करता है।




