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क्रिकेट में नहीं मिली पहचान, जैवलिन में बन गया नया सुपरस्टार! कॉमनवेल्थ में रचा इतिहास

श्रीलंका के लिए 17 साल की उम्र तक तेज गेंदबाज बनने का सपना संयोए रुमेश थरंगा पथिरागे ने क्रिकेटर बनने का ख्वाब टूटने के बाद जैवलिन को नया हथियार बनाते हुए आज कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्डन बॉय बने।

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द्वाराKalpesh Kalal
प्रकाशित अपडेट 4 मिनट पढ़ें
Rumesh Tharanga Pathirage creates history in Commonwealth Games
Rumesh Tharanga Pathirage creates history in Commonwealth Games

Rumesh Tharanga Pathirage creates history in Commonwealth Games:  सपना था क्रिकेटर बनने का... इसे पूरा करने के लिए अपने जीवन के 17 साल लगा दिए और अपने देश की नेशनल टीम के लिए खेलने की चाहत के साथ आगे बढ़ते रहे। एक तेज गेंदबाज बनने की कोशिश और स्पीड 135 किमी प्रतिघंटा...लेकिन फिर अचानक ही कुछ ऐसा हुआ कि क्रिकेटर बनने का ख्वाब छोड़ा और 5 साल तक ऐसी मेहनत की कि आज वो जैवलिन में श्रीलंका के सुपरस्टार बन गए।

क्रिकेटर बनने का टूटा ख्वाब और 5 साल में बन गया गोल्डन बॉय

क्रिकेट में पहचान पाने की खूब कोशिश से भी वो चाहत पूरी नहीं हुई, लेकिन फिर भी श्रीलंका के लिए जैवलिन के नए गोल्डन बॉय बनने की ये कहानी है रुमेश थरंगा पथिरागे की, जिन्होंने ग्लास्गो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन स्पर्धा में बने गोल्ड मेडलिस्ट

ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा के फाइनल में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने दूसरे प्रयास में 89.73 मीटर का थ्रो किया। उनका यही प्रयास पूरे मुकाबले का सर्वश्रेष्ठ साबित हुआ और उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

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भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर तक भाला फेंककर कड़ी चुनौती दी, लेकिन वह रुमेश के रिकॉर्ड को पार नहीं कर सके और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। वहीं, भारत के उभरते खिलाड़ी यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का थ्रो कर तीसरा स्थान हासिल किया और ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे।

17 साल की उम्र तक बनना चाहते थे तेज गेंदबाज

रुमेश थरंगा पथिरागे की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। 17 साल की उम्र... हाथ में क्रिकेट की गेंद... 135 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार... और सपना सिर्फ एक, श्रीलंका की क्रिकेट टीम की जर्सी पहनना। लेकिन किसे पता था कि यह तेज गेंदबाज आगे चलकर क्रिकेट नहीं, बल्कि जैवलिन थ्रो में इतिहास रचेगा।

कोच ने देखी भालाफेंक में प्रतिभा, फिर बदल गया सपना

श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे कभी एक होनहार फास्ट बॉलर थे। स्कूल और घरेलू स्तर पर उनकी तेज गेंदबाजी की खूब चर्चा होती थी। लेकिन इसी दौरान कोचों की नजर उनकी असाधारण थ्रोइंग पावर पर पड़ी। उन्होंने रुमेश को क्रिकेट के साथ-साथ जैवलिन थ्रो में भी हाथ आजमाने की सलाह दी। शुरुआत में यह सिर्फ एक प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे यही खेल उनकी नई पहचान बन गया।

इसके बाद रुमेश ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने क्रिकेट के सपने को पीछे छोड़कर पूरी तरह जैवलिन थ्रो पर फोकस करना शुरू कर दिया। नया खेल, नई तकनीक और कड़ी ट्रेनिंग... हर दिन उनके लिए एक नई चुनौती था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे।

कॉमनवेल्थ 2026 में नीरज चोपड़ा को हराकर बने सुपरस्टार

उनकी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम तब मिला, जब महज पांच साल के भीतर उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट के रूप में स्थापित कर लिया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रुमेश ने अपने दूसरे प्रयास में 89.73 मीटर का शानदार थ्रो किया, जो पूरे मुकाबले का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ। इसी ऐतिहासिक थ्रो के दम पर उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर श्रीलंका का नाम रोशन कर दिया।

रुमेश की कहानी इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि मेहनत और सही दिशा किसी भी खिलाड़ी की किस्मत बदल सकती है। जो खिलाड़ी कभी क्रिकेट के मैदान पर तेज गेंदबाज बनने का सपना देखता था, वही आज जैवलिन थ्रो में श्रीलंका का नया गोल्डन हीरो बन चुका है।

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