भारत के खिलाफ हार गया अफगानिस्तान, लेकिन खाते में आए करोड़ों! कहां से हुई इतनी कमाई?
अफगानिस्तान की मेजबानी में भारत की राजधानी दिल्ली में भारत और अफगानिस्तान के बीच 3 मैचों की टी20 सीरीज खेली गई। इस सीरीज में टीम इंडिया ने 3-0 से कब्जा किया, लेकिन फिर भी अफगानिस्तान की बल्ले-बल्ले हुई।

Afghanistan Cricket Board's earnings from IND vs AFG series: भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज में मैदान पर भले ही टीम इंडिया का दबदबा देखने को मिला, लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यहां मालामालल हो गई है। अफगानिस्तान को 3 मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज में 0-3 से क्लिन स्वीप का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके क्रिकेट बोर्ड के लिए यह दौरा आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद बताया जा रहा है।
भारत से मिली सीरीज में 0-3 से हार, फिर भी अफगानिस्तान मालामाल
अनुमान के मुताबिक, बोर्ड ने इस सीरीज से करोड़ों रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है। अब सवाल है कि भारत में खेली गई इस सीरीज से अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को कितनी कमाई हुई और इसके पीछे पूरा बिजनेस मॉडल क्या था? आइए जानते हैं।
दिल्ली में खेली गई सीरीज, अफगानिस्तान को मिला होम ग्राउंड
भारत और अफगानिस्तान के बीच तीनों टी20 मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए। खास बात यह रही कि सीरीज भारत में आयोजित होने के बावजूद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को मेजबान की भूमिका मिली। बीसीसीआई की ओर से अरुण जेटली स्टेडियम को इस सीरीज के लिए अफगानिस्तान के होम ग्राउंड के तौर पर उपलब्ध कराया गया।
इस व्यवस्था का अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कॉमर्शियल स्तर पर भी फायदा उठाया। बोर्ड ने मीडिया राइट्स, टाइटल स्पॉन्सरशिप, ऑन-ग्राउंड स्पॉन्सरशिप और अन्य कमर्शियल अधिकारों के जरिए रेवेन्यू जुटाया। भारत जैसे बड़े क्रिकेट बाजार में सीरीज आयोजित होने से इन अधिकारों की व्यावसायिक अहमियत भी बढ़ी।
मीडिया राइट्स से करीब 57 करोड़ रुपये की कमाई
अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की अनुमानित कमाई में सबसे बड़ा योगदान मीडिया राइट्स का बताया जा रहा है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, बोर्ड ने प्रति मैच करीब 19 करोड़ रुपये के हिसाब से मीडिया राइट्स का सौदा किया। तीन मैचों को मिलाकर यह रकम लगभग 57 करोड़ रुपये बैठती है।
सीरीज के ग्लोबल मीडिया राइट्स पार्टनर के तौर पर Trans Group जुड़ा था। भारत में मुकाबलों की डिजिटल स्ट्रीमिंग FanCode पर उपलब्ध थी, जबकि प्रसारण व्यवस्था में Sony की भी भागीदारी रही। इस तरह टीवी और डिजिटल मीडिया राइट्स ने बोर्ड की कुल कमाई में अहम भूमिका निभाई।
स्पॉन्सरशिप से भी बरसे करोड़ों रुपये
मीडिया राइट्स के अलावा स्पॉन्सरशिप डील्स से भी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अच्छी कमाई होने का अनुमान है। टाइटल और ऑन-ग्राउंड स्पॉन्सरशिप से करीब 15 से 20 करोड़ रुपये के रेवेन्यू की बात सामने आई है। दुबई की टेलीकॉम कंपनी Etisalat सीरीज से प्रमुख रूप से जुड़ी थी। इसके अलावा Super Cola, Wild Stone, Intex Technologies, Weni, Delta Exchange और Haier जैसे ब्रांड्स के नाम भी सीरीज और अफगानिस्तान टीम से जुड़े कॉमर्शियल पार्टनर्स में शामिल बताए गए हैं। अलग-अलग स्पॉन्सरशिप कैटेगरी के जरिए बोर्ड ने कई कंपनियों को अपने साथ जोड़ा, जिससे सीरीज की कुल कॉमर्शियल वैल्यू बढ़ी।
टिकट बिक्री और दूसरे कमर्शियल अधिकारों से भी कमाई
दिल्ली में मुकाबले होने के कारण टिकट बिक्री से भी बोर्ड को रेवेन्यू मिला। इसके अलावा स्टेडियम के अंदर कॉमर्शियल टेंडर्स, गेट रिसीट और अन्य गतिविधियों से करीब 5 से 8 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री और दूसरे कमर्शियल रेवेन्यू को जोड़ा जाए, तो अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड का ग्रॉस रेवेन्यू करीब 75 से 85 करोड़ रुपये के बीच पहुंचने का अनुमान है।
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खर्च निकालने के बाद करीब 50 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट?
सीरीज के आयोजन में भी बोर्ड को कई तरह के खर्च करने पड़े। इनमें स्टेडियम से जुड़े खर्च, मैच ऑपरेशन, टीमों की व्यवस्थाएं, प्रोडक्शन और अन्य आयोजन संबंधी लागत शामिल हैं। इन खर्चों को ग्रॉस रेवेन्यू से घटाने के बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड का नेट प्रॉफिट करीब 50 करोड़ रुपये रहने का अनुमान बताया जा रहा है। हालांकि, यह आंकड़ा अनुमानित है और बोर्ड की ओर से आधिकारिक ऑडिटेड वित्तीय विवरण सार्वजनिक होने पर ही वास्तविक लाभ की पुष्टि हो सकेगी।
कुल मिलाकर, भारत के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए सिर्फ क्रिकेटिंग मुकाबला नहीं, बल्कि एक बड़ा कॉमर्शियल अवसर भी साबित हुई। मैदान पर नतीजा भले ही अफगानिस्तान के पक्ष में नहीं रहा, लेकिन मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप और अन्य कमर्शियल गतिविधियों के जरिए बोर्ड को आर्थिक फायदा मिलने की बात सामने आई है।




