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कैसे सोनल दिनुशा टीम इंडिया के लिए बन गए सबसे बड़ी पहेली? एक अकेले खिलाड़ी ने भारतीय टीम के उड़ाएं होश

भारत औ श्रीलंका के बीच खेली गई 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में श्रीलंका के 25 साल के युवा खिलाड़ी सोनल दिनुशा सबसे बड़ी खोज बनकर निकले। उन्होंने सीरीज में 3 शतक जड़े।

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द्वाराKalpesh Kalal
प्रकाशित 6 मिनट पढ़ें
Sonal Dinusha
Sonal Dinusha

Sonal Dinusha becomes a puzzle for Team India: श्रीलंका में भारतीय टीम ने एक और टेस्ट सीरीज अपने नाम कर ली है। कोलंबो में खेले गए सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच के ड्रॉ होने के साथ ही सीरीज शुभमन गिल की सेना ने 1-0 से अपने नाम कर ली हो, लेकिन एक श्रीलंकाई खिलाड़ी ने इस पूरी सीरीज में टीम इंडिया के होश ठिकाने लगा दिए। जिन्होंने 4 पारियों में 3 शतकों के साथ भारतीय टीम को खूब परेशान किया।

सोनल दिनुशा बने श्रीलंका के लिए वन मैन आर्मी

श्रीलंका गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच को 165 रन से हार गई, तो वहीं कोलंबो टेस्ट में भी फॉलोऑन खेलते हुए हार की राह पर खड़ी थी, लेकिन सोनल दिनुशा ने अकेले ही अपनी टीम को हार के मुंह से बाहर निकाला और ढाल बनते हुए दूसरे टेस्ट मैच को ड्रॉ करवा दिया। 

कैसे 25 साल के सोनल बने टीम इंडिया के लिए पहेली?

भारतीय टीम इस दौरे पर फेवरेट मानी जा रही थी और फेवरेट जैसा प्रदर्शन भी किया, लेकिन फिर भी टीम इंडिया की रणनीति की हवा निकाल दी, वो हैं सोनल दिनुशा। आखिर श्रीलंकाई  के 25 साल के इस खिलाड़ी ने कैसे वर्ल्ड क्रिकेट की सबसे बेस्ट स्पिन अटैक की रणनीति को फेल कर दिया। कैसे सोनल दिनुशा भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी पहेली बन गए।

भारतीय स्पिन को खेलने के लिए दिनुशा ने स्विप को बनाया हथियार

भारतीय स्पिनरों के खिलाफ जहां ज्यादातर बल्लेबाज दबाव में नजर आए, वहीं दिनुशा ने एक ऐसा तरीका अपनाया जिसने उन्हें लगातार रन बनाने का मौका दिया। तो चलिए हम सोनल दिनुशा की भारतीय स्पिन के खिलाफ सक्सेस के पीछे के सबसे बड़े राज के बारे में जानते हैं।

सोनल दिनुशा का सबसे बड़ा हथियार बना स्वीप शॉट। सीरीज में स्पिन के खिलाफ स्वीप खेलते हुए सोनल दिनुशा ने 173 रन बनाए और इस दौरान एक बार भी अपना विकेट नहीं गंवाया। यही आंकड़ा बताता है कि भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ उनकी तैयारी कितनी मजबूत थी।

स्पिनर्स के खिलाफ स्वीप खेलकर बनाए बिना आउट हुए 173 रन

टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है गेंद की टर्न और उछाल को पढ़ना। खासकरश्रीलंका जैसी परिस्थितियों में जहां स्पिनरों को पिच से मदद मिल सकती है। लेकिन दिनुशा ने भारतीय स्पिनरों को उनके ही हथियार से जवाब देने का तरीका खोज लिया। वह गेंद की लाइन और लेंथ को जल्दी पहचानकर स्वीप और उससे जुड़े शॉट्स का इस्तेमाल करते रहे। इससे उन्हें सिर्फ बाउंड्री ही नहीं मिलीं, बल्कि फील्ड में खाली जगहों से लगातार रन भी मिलते रहे। नतीजा यह रहा कि स्पिन के खिलाफ स्वीप खेलते हुए उनके नाम 173 रन हो गए और इस दौरान भारतीय गेंदबाज उन्हें आउट नहीं कर सके।

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भारतीय स्पिनरों के खिलाफ नहीं दिखा डर

भारत की गेंदबाजी की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्पिन यूनिट मानी जाती है। श्रीलंका की परिस्थितियों में भारतीय स्पिनरों से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन दिनुशा ने उनके खिलाफ बेहद सकारात्मक रवैया अपनाया। उन्होंने स्पिनरों को सिर्फ डिफेंस करके खेलने के बजाय उन्हें दबाव में डालने की कोशिश की। जैसे ही गेंद उनके स्वीप खेलने वाले क्षेत्र में आई, उन्होंने मौके का फायदा उठाया।

इस रणनीति का फायदा यह हुआ कि भारतीय गेंदबाजों को फील्ड में बदलाव करने पड़े। फाइन लेग, स्क्वायर लेग और डीप स्क्वायर लेग जैसी पोजीशन पर फील्डर लगाने से फील्ड फैल गई और दिनुशा को सिंगल-डबल निकालने के और मौके मिलते गए। दिनुशा की इस खासियत को समझने के लिए सिर्फ उनके कुल रन देखने की जरूरत नहीं है। स्पिन के खिलाफ स्वीप से बनाए गए 173 रन और एक भी बार आउट हुए बिना अपने आप में उनकी बल्लेबाजी की कहानी बताते हैं।

यानी भारतीय स्पिनरों ने उन्हें स्वीप खेलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन दिनुशा ने अपने शॉट के चयन और टाइमिंग से लगातार रन बटोरे। यही कारण है कि भारत के खिलाफ इस सीरीज में वह श्रीलंका के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में नजर आए।

दबाव में भी नहीं बदली रणनीति

किसी भी बल्लेबाज के लिए एक ही शॉट को लगातार इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर टेस्ट क्रिकेट में, जहां गेंदबाज लंबे स्पेल में एक ही बल्लेबाज के खिलाफ योजना बदलते रहते हैं। लेकिन दिनुशा ने अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। वह जरूरत के मुताबिक स्वीप खेलते रहे और खराब गेंदों का इंतजार भी करते रहे। यही संतुलन उनकी बल्लेबाजी की खासियत बना। उन्होंने हर गेंद पर आक्रामक होने की कोशिश नहीं की, बल्कि जब उन्हें लगा कि स्वीप खेलने का मौका है, तब उन्होंने उसे भुनाया।

सीरीज में सबसे ज्यादा 420 रन बनाने में सफल रहे सोनल दिनुशा

सोनल दिनुशा 2 मैचों की इस सीरीज में सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज में से एक रहे। उन्होंने गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में शतक लगाया, तो वहीं दूसरी पारी में भी शतक के करीब पहुंचे। इसके बाद कोलंबो में इस खिलाड़ी ने दोनों पारियों में शतक जड़े। इस सीरीज में दिनुशा ने 4 पारियों में 140 की असाधारण औसत से 420 रन बनाए। इस दौरान उनकी स्कोर लाइन 100, 84, 103 और 133* रही।

सीरीज के आंकड़ों में शायद सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला नंबर यही है—173 रन और कोई डिसमिसल नहीं। यानी जितनी बार सोनल दिनुशा ने स्पिन के खिलाफ स्वीप का सहारा लिया, भारतीय गेंदबाज उन्हें उस शॉट के जरिए आउट नहीं कर सके। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई और यही वजह है कि भारत के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज में सोनल दिनुशा की बल्लेबाजी को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

श्रीलंका के लिए यह सिर्फ एक बल्लेबाज की अच्छी फॉर्म नहीं, बल्कि एक ऐसी बल्लेबाजी तकनीक की झलक है जो आने वाले समय में दुनिया की दूसरी स्पिन यूनिट्स के खिलाफ भी उनके लिए बड़ा हथियार बन सकती है।

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